Monday, November 5, 2018

जानिये "स्टेचू ऑफ़ यूनिटी" और "सरदार वल्लभभाई पटेल" के जीवन से जुडी बेहद ख़ास बाते।


नमस्कार..!दोस्तों आज  हम बात  करने  जा रहे हैं "स्टेचू ऑफ़ यूनिटी" पर  और  जानेगे  "स्टेचू ऑफ़ यूनिटी" से जुडी कुछ बेहद  ख़ास बाते
  दोस्तों आगे इसपर  बात करने से पहले  हम जानेगे   "स्टेचू ऑफ़ यूनिटी" वाले  महापुरुष याने , अदर्निया श्री "सरदार वल्लभ पटेलके  बारे मैं और क्यू उन्हें  "आयरन मन ऑफ़ इंडिया" के नाम  पुकारा जाता हैं और इस  स्मारक का नाम "स्टेचू ऑफ़ यूनिटी" रखा गया हैं दोस्तो सरदार वल्लभ भाई का जनम 31-अक्टूबर सेंट 1875 मैं  गुजरात का "नडियाद" प्रान्त मैं हुआ था|

वैसे तो दोस्तों सरदार वल्लभ भाई पटेल का पुरा नाम सिर्फ  "वल्लब भाई पटेल" था पर देश की आज़ादी मुख्यपूर्ण  अपना योगदान देते  हुए  सान 1928 मैं गुजरात मुख्य मैं एक सत्याग्रह आंदोलन जिस्से "बारडोली सत्याग्रह" के नाम से जाना  जाता है| उसकी सफ़लता पूर्वक  प्रतिनिधिति का भर सँभालते हुए  वाहा की माहिलाओ ने अनहे "सरदार" की उपदी दी जिस्के बाद से अनहे "सरदार वल्लभ भाई पटेल" के नाम से पुरे विश्व मैं  जांनने लगेअब  बत करते  हैं देश ,मैं   अनके मुख्य  राजनीतिज्ञ  योगदान की, सरदार वल्लभभाई पटेल  इस सवतंत्र  भारत के पाहेल उप-प्रधान  मंत्री  और सथ ही  साथ पहल केंद्रीय गृह  मंत्री  हैं। दोस्टो अब एक खास बात जो आपको पता होना चाहिए हमारे, हमारे  इस देश पर  अंगेर्जो   हुकुमत करने से  पहले, हमारे  देश मैं  खाई सारे राजवाडो की रियासते  या राज्य हुआ करते थेजिसे हम  "प्रिन्सीय स्टेटया "सिद्धांतित राज्यभी कहते हैं  कुल मिलकर हमरे के लिए देश मुख्य है ६००  छोटी बड़ी रियासते  हुआ क्रती थी, जिस्के अंगेरजो ने अपनी गुलमी केचलते  एक सूत्र  एक  ब्रिटिश राज कानून  के  ताले बंध दीया था, फिर आया सं १९४७ का दौर  और येही वो समय था जब हामरे देश के ब्रिटिश राज  के मुख्या अधिरकारी वाइसरॉय माउंट बटेन ने देश को अजाद करते हुए  हमे देश विभाजन  का भी साधमा दीया जाह हमारे इस अतुल्य भारत का बटवारा करदिया गया और इस्का नाम पाडा  " रिपब्लिक ऑफ़ इंडिया " और इस्लामीक रिपब्लिक ऑफ़  पाकिस्तान|

           इतना  ही नहीं वाइस-रोय माउंटबेटन का दिया  ये दार्द काम हुआ नहीं था  के उन्होंने  एक शर्त और राख दी के जितनी भी रियासतें हैं, वो अपना अलग देश  भोगोलिक या राजनीत समिकरणमैं खुदको  हिंदुस्तान या पाकिस्तान देश मैं  शामिल होना  ना होना इसका फैसला स्वतंत्रताः उन्ही पास होगा जिस्के बाद स्वातत्र भारत  मैं  कुल ५६२   अलाग अलाग राज घराने  हुआ करते थे , जिस्का एककिरन करने का भर संभाला  "सरदार वल्लभी पटेल" और   उस  समय इस्देश के कूनूनी सलाहाकर "पीवी मेनन" ने। जिस्के चलते बाकि सभी राज्य  भारत को एक राष्ट्र  मन्नने  की स्वाकार्ता देते हुए भारत मैं शमिल होगए, सिर्फ हैदराबाद।  जुनागढ़ और कश्मीर को छोड़के  ककी यहाँ की शासक , खुद  का  एक अलग  देश बनाना चाहते  थे दोस्तों असल मैं हम बात करे अंगेरजो की टी असल मैं उनका देश  को आज़ादी देने का असल मक्काद ही यह था के वो इस देश  को टूड़को मैं बात सके, जैसे सोवियत सांग टुकड़े  होकर| रूस, काज़किस्तान, तुर्कमेनिस्तान जैसे कही सारे देश दुनिया  के नक्षे पर गेए|
वैसा ही कुच एंग्रेज़ हमारे इस  दे देश के भी साथ करना चाहते थे , पर उनके ये इरादों  को विफल हू  हमारे  जारी देश का एकीकरण  "सरदार वल्लभाई पटेल", केवल जम्मू कश्मीर, जुनागढ़ और हैदराबाद के राजाओं ने ऐसा  हीं  स्वकृता दे जिसके बाद जूनागढ़ के नवाब के राज्य मैं इसका  बहुत विरोध हुआ तो वह भागकर पाकिस्तान चला गया और जुनागढ़ भी भारत में मिल गया। जब हैदराबाद के निजाम "मिर उस्मान अली" ने भारत में विलय का प्रस्ताव अस्वीकार किया तो सरदार पटेल ने वहां सेना भेजकर निजाम का आत्मसमर्पण करवा लिए किन्तु जवाहर लाल नेहरू ने काश्मीर को यह कहकर अपने पास रख लिया  कि यह समस्या एक अंतर राष्ट्रीय समस्या   है और ये मुद्दा आजतक वैसा का वैसा ही बना हुआ हैं , और इस तरह  सरदार ने अपने ड्रड निश्चय  और संकल्प से  लोहे की तरह  मज़बूत और ठोस तरह का परिचय देते हुए, आजके भारत का नक्ष जो हम सामने सबके  है वह  बन  पाया, जिसके बाद  महात्मा गांधी दवरा अनहे "भारत के लौह पुरुष" अर्थात  "आयरन मन ऑफ़ इंडियाकी उपदी दी गाई,और ईसी राष्ट्र एकता को याद कर हू सरदार वल्लभ भाई पटेल के बने स्मारक को "स्टेचू ऑफ़ यूनिटी " का नाम दिया गया इसके  अलवा एक खस बात  और दोस्तो आप परियोजना  जिस्का प्रधान मंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा शिलान्यास बाद|   "देश भर के किसानो से मिटटी और लोहा  मैंगवाया गया| जोके इस मूर्ति  नाम  मैं  और भी जयदा सतीता लता है।

"स्प्रिंग टेम्पल बुद्धा "
अब बात करेंगे स्टेचू ऑफ़ यूनिटी बानी कहा पर हैं , और जानेगे  इस्के निर्माण से जुड़ी खुच खस बाते , यह मूर्ति गुजरात के भरुच के पास मुख्य नर्मदा नदी पर  बाने सरदार सरोवर बांध से 3.2 किमी की दूरी पर "साधु बेट" नामक एक टापू पे  बनया गया है। दोस्ती आज की तारिक मैं , स्टेचू ऑफ़ यूनिटी दुनिया की सबसे  उची स्मारक का  दर्जा प्रता कर चुकी | , इस्के पहले चीन मैं  बाने   "स्प्रिंग टेम्पल बुद्धा "जिस्की ऊंचाई "153 मीटर" है दुनीया की सबसे ऊंची  स्मारक हुआ करती  थी अबबात करेंगे स्टेचू ऑफ़ यूनिटी  और इस्के निर्माण से  जुडी कुछ खास बातो पर, यह पारिओजन की घोषाण "7 अक्टूबर 2010" मैं गुजरात सरकार दवरा की गई थी और उसी दीन "सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट (एसवीपीआरईटी)" की भी स्तापना  की गाई थीइसके  बाद साल  2014 मई  बीजेपी के कंद्रे मैं  सत्ता  सँभालते हीसरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट को भारत सरकार का साथ मिल, जिस्के बाद  बतौर  प्रोजेक्ट कंसेल्टेंट अर्थातपरियोजना प्रबंधक दुबई की मशूर इमरत बनाने  वाली कंपनी "टर्नर कंस्ट्रक्शन" की सहयाता ली गाई। उसके बाद परियोजना का टेंडर होने पर " एंड  टी " याने  लार्सन एंड टूब्रो ने अक्टूबर 2014  मैं सबसे कम 2,98 9 करोड़ (यूएस $ 436.39 मिलियन) की बोली लगाई जिसमे  डिजाइन, निर्माण और रखरखाव शामिल है,जिसके बाद मई मैं  मुख्यतः  इसका निर्माण कार्य शुरू किया  गया|


              


अब बात करेंगे  मूर्ति के डिजाइन कीइसका डिज़ाइन की जोके महारष्ट्र धुले  के "रामवीर सुतार ने"द्वारा किया गया हैं , जोके एक  चर्चित मुर्तिकर है|

  जिन्हे 1 999 मैं  पदमश्री और 201 6 मैं  पद्भुषण पुरूस्कर से समनीत भी किया जा  था चुक्का है


बात करे स्टेचू ऑफ़ यूनिटी की  कुल की उचाई  की तो यह  "182" मीटर हैं जिसमे 25 मीटर का बेस  भी शामिल हैं, जिस्मे प्रदर्शनी  हॉ
"स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी
"स्टेचू ऑफ़ यूनिटी"
है और मूर्ति की  ऊंचाई  की तो ये "157, मीटर" उची है|जोके  अमेरिका न्यूयॉर्क मैं "स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी" जिस्की उचाई  "9 3" मीटर  है जिससे  "89" मीटर  याने उससे 
 दुग्नी से भी ज़ादा उची है।


स्टेचू ऑफ़ यूनिटी का कुल निर्माण तीन भागो मैं हुआ| जिसमे सब्से पहल "आरसीसी" याने "रैफ़्रो  सीमेंट कंक्रीट" जिसे हम सामान्य  भाषा सीमेंट कंक्रीट दो  "127, 127 मीटर उचे  और बेहद  विशालकाय पिलर बनाये गए, जिसमे एक एक लिफ्ट  भी लगी हुई हैंजोके 4मीटर  प्रति सेकंड की रफ़्तार  साथ सामान्य वज़न के लग भाग  26 लोगो को  एक साथ ऊपर और निचे लेन मैं सक्षम होंगीइसके अपर की परत स्टील की है और उसके ऊपर की  फाइनल लेयर कासे की 8 मिलीमीटर एक थोड परत हैजो हमे नज़र आएगी जिसे  स्टील के स्ट्रक्चर से ढलाई करके जोड़ा गया है जोके चीन की एक कंपनी जिस्का नाम" जियांग्ज़ी टोकिन मेटल क्राफ्ट कारपोरेशन  लिमिटेड" है। आकलन करे इसमें लगे हुए मटेरियल की  जिसमे  70,000 मीट्रिक  टन सीमेंट ,  लाख १२०० हज़ार क्यूबिक मीटर कंक्रीट , 18000  मीट्रिक टन और  6500 मीट्रिक टन स्ट्रक्चरल स्टील लगा हुआ है और इसकी भव्यता वजह से कासे 2200  स्क्वायर मीटर याने 7000 कासे  की प्लेट्स को वेल्डिंग करके जोडा गया है|   जिस्के लिय चिन की बताई गई  कंपनी की मदत लेनी पाडी तो दोस्तों  ये था हमरा स्टेचू ऑफ़ यूनिटी पर  उम्मीद करता हु इस लेक माध्यम से आपको आपके मन मैं चल रहे सारे सवालो जवाब मिल चुके होंगे. इससे जुड़े विचार शंका, और लेख कैसा लगा इसपर अपनी रायेोम्मेन्त सेक्शन मैं और ज़र्रों बताइयेगा, दोस्तों गायन बाटने से बढ़ता हैं इसलिए इस लेख को ज़यादा  लोगो से शेयर ज़र्रोर और इस पोस्ट को लिखे भी कीजिये गए|



जबतक मैं आपका दोस्त और इस लेख का लेखक "तरीके शेख" आपसे विदा कहता हु, सो आई  ऍम  तरीके शेख साइनिंग ऑफ स्टे हेअल्थी, वेअल्थी एंड टेक केयर|


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